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DARD BHARI SAD SHAYARI IN ENGLISH AND HINDI

 Hello दोस्तों ये दुनिया है तो बड़ी खूबसूरत पर यहाँ कदम-कदम पर कांटें बिछे हुए। यहाँ थोड़ी ख़ुशी मिलेगी तो थोड़ा दर्द भी सहना पड़ेगा,सबसे ज्यादा और सबसे बड़ा दर्द प्यार में मिलता है तो आज इस टॉपिक के लिए हमारे कलेक्शन में प्यार का दर्द शायरी,दिल का दर्द शायरी ,मोहबत्त का दर्द शायरी ,लव पैन शायरी,नई दर्द भरी शायरी, यहाँ आपको दर्द भरी शायरी पढ़ने को मिलेगी।Love Pain Shayari In Hindi and dard bhari shayari image

DARD BHARI SAD SHAYARI IN ENGLISH AND HINDI



Dard bhari shayari


पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
Paas jab tak wo rahe dard thama rehta hai
failta jata hai fir aankh ke kajal ki tarah



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दिल से महसूस कर सकते हैं उस दर्द को
जो तेरी कलम ने एक-एक करके तराशा है
Dil se mehsoos kar sakte hai us dard ko
jo teri kalam ne ek-ek karke tarasha hai


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Dard bhari shayari in english


इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
Ishrat-a-katra hai dariya me fana ho jana
dard ka had se gujarna hai dava ho jana


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मेरे दर्द का जरा सा हिस्सा लेकर तो देखो
सदियों तक याद करते रहोगे तुम भी
Mere dard ka jara sa hissa lekar to dekho
sadyion tak yaad karte rahoge tum bhi


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वो आज खूने-दिल से मेंहदी लगाये बैठे हैं
सारे किस्से मेरे दिल से लगाये बैठे हैं
ख़ामोशी में भी एक शोर है उनकी
सुर्ख जोड़े में खुद को बेवा बनाये बैठे हैं
Wo aaj khoon-dil se mehndi lagaye baithe hai
saare kisse mere dil se lagaye baithe hai
khamoshi mebhi ek shor hai unki
surkh jode me khud ko beba banaye baithe hai


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Dard bhari shayari in hindi


ये सच है कि हम मोहब्बत से डरते हैं
क्यूँ कि ये प्यार दिल को बहुत तड़पाता है
आँख में आँसू तो हम छुपा सकते हैं
दर्द-ए-दिल दुनिया को पता चल जाता है



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ना मिटा सकोगे मेरी यादों को दिल से
तेरे दिल के किसी कोने में आज भी हूँ मैं



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कितना लुत्फ ले रहे हैं लोग मेरे दर्द-ओ-ग़म का
ऐ इश्क़ देख तूने तो मेरा तमाशा ही बना दिया



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लोग मुन्तज़िर ही रहे कि हमें टूटा हुआ देखें
और हम थे कि दर्द सहते-सहते पत्थर के हो गए



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बहुत दर्द हैं ऐ जान-ए-अदा तेरी मोहब्बत में
कैसे कह दूँ कि तुझे वफ़ा निभानी नहीं आती



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दुआ मांगी थी आशियाने की
चल पड़ी आंधियां ज़माने की
मेरे गम को कोई समझ न पाया
मुझे आदत थी मुस्कराने की



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शीशा तो टूट कर, अपनी कशिश बता देता है
दर्द तो उस पत्थर का हैं, जो टुटने के काबिल भी नही



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देने आये हैं मेरे दर्द की कीमत मुझको
इतने हमदर्द हैं न जाने क्यों लोग मेरे



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कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ
कि खुदा नूर भी बरसाता है आज़माइशों के बाद



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हम मौत को भी जीना सिखा देंगे
बुझी जो शमा तो उसे भी जला देंगे
कसम तेरे प्यार की जिस दिन हम जायेंगे
दुनिया से एक बार तुजे भी रुला देंगे



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तुम पर बीतेगी तो तुम भी जान जाओगे मोहसिन
कोई नज़र अंदाज़ करे तोह कितना दर्द होता है



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दर्द मोहब्बत का ऐ दोस्त बहुत खूब होगा
न चुभेगा.. न दिखेगा.. बस महसूस होगा



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उसकी हँसी में छुपे दर्द को महसूस तो कर
वो तो यूँही हँस हँस के खुद को सजा देता है



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जिंदगी हमारी यूं सितम हो गई
खुशी ना जानें कहां दफन हो गई
लिखी खुदा ने मुहब्बत सबकी तकदीर में
हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई



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दिल को ऐसा दर्द मिला... जिसकी दवा नहीं
फिर भी खुश हूँ मुझे उस से कोई शिकवा नहीं
और कितने अश्क बहाऊँ अब उस के लिए
जिसको खुदा ने मेरी किस्मत में लिखा ही नहीं



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बहुत जुदा है औरों से
मेरे दर्द की कैफियत
ज़ख्म का कोई पता नहीं और
तकलीफ की इन्तेहाँ नहीं



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Dard shayari in hindi


नज्म लिखूं आज कोई यह वक़्त का तकाजा है
मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है
छलक जाते हैं मेरे आंसू मेरे ही कागज पर
लगता है कि कलम में स्याही का दर्द ज्यादा है



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दिल अमीर था और मुकद्दर गरीब था
अच्छे थे हम मगर बुरा नसीब था
लाख कोशिश कर के भी कुछ ना कर सके हम
घर भी जलता रहा और समंदर भी करीब था



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ढूंढता रहा मैं इश्क को दिल की गहराई में
कमबख्त मिला तो सही दर्द में तन्हाई में



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रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का प्याला उसे
एक दर्द जो दिल में है मरता ही नहीं है



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अश्कों का एक खुश्क दरिया बहता है मुझमें
सैलाब है मगर चुपचाप-सा रहता है मुझमें



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Dard bhari shayari hindi


मैं फिर से निकलूंगा तलाश ए-जिन्दगी में
दुआ करना दोस्तो इस बार किसी से इश्क ना हो



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तुझे जब देखता हूँ तो खुद अपनी याद आती है
मेरा अंदाज़ हँसने का कभी तेरे ही जैसा था



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क्या-क्या नहीं किया मैंने तेरी एक मुस्कान के लिए
फिर भी अकेला छोड़ दिया उस अनजान के लिए



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आँखों में उमड़ आता है बादल बन कर
दर्द एहसास को बंजर नहीं रहने देता



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एक उम्मीद मिली थी तुम्हारे आने से अब वो भी टूट गई
वफादारी की आदत थी हमें अब शायद वो भी छूट गई



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मेरे दर्द ने मेरे ज़ख्मों से शिकायत की है
आँसुओं ने मेरे सब्र से बगावत की है
ग़म मिला है तेरी चाहत के समंदर में
हाँ मेरा जुर्म है कि मैंने मोहब्बत की है



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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता



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दर्द से रिश्ता पुराना रहा
हर कदम एक नया फ़साना रहा
किसे कहे ये दिल अपना?
यहाँ तोह हर अपना बेगाना रहा



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तेरी मोहब्बत में हम बैठें हैं चोट खाए
जिसका हिसाब न हो सके उतने दर्द हमने पाये
फिर भी तेरे प्यार की कसम खाके कहता हूँ
हमारे लब पर तेरे लिये सिर्फ और सिर्फ दुआ आये



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खामोशियाँ कर देतीं बयान तो अलग बात है
कुछ दर्द हैं जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते



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ज़माने में किसी पर ऐतबार मत करना
किसी की चाहत में दिल बेकरार मत करो
या तो हौंसला रखो दर्द-ए-दिल सहने का
या फिर किसी से इश्क मत करो



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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता



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एक बात सिखाई है ताजुर्वे ने हमें
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है



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गुलशन की बहारों पे सर-ए-शाम लिखा है
फिर उस ने किताबों पे मेरा नाम लिखा है
ये दर्द इसी तरह मेरी दुनिया में रहेगा
कुछ सोच के उस ने मेरा अंजाम लिखा है



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किससे पैमाने वफ़ा बाँध रही है बुलबुल
कल न पहचान सकेगी गुल-ए-तर की सूरत



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तुम्हारी याद के साए मेरे दिल के अँधेरे में
बहुत तकलीफ देते हैं मुझे जीने नहीं देते
अकेली राह में हमराह कोई मिल तो जाता है
मगर कुछ दर्द हैं जो दिल बहलने नहीं देते



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अब बस भी कर ज़ालिम, कुछ तो रहम खा मुझ पर
चली जा मेरी नज़र से दूर कहीं मैं शायर ना बन जाऊं



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नसीहत अच्छी देती है दुनिया
अगर दर्द किसी ग़ैर का हो



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भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया
तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया
किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो
सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया



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मैं एक बेक़सूर वारदात की तरह जहाँ की तहाँ रही
तुम गवाहों के बयानो की तरह बदलते चले गए



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लफ्ज़-ए-तसल्ली तो बस एक तकल्लुफ है
जिसका दर्द उसका दर्द बाकी सब अफ़साने



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अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई
तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं



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ग़म सलीके में थे जब तक हम खामोश थे
जरा जुबान क्या खुली दर्द बे-अदब हो गए



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वफ़ा और मोहब्बतों के ज़माने गये जनाब
अब तो दिल को बहलाने का सामान है मोहब्बत



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मुस्कुराने से भी होता है दर्द-ए-दिल बयां
किसी को रोने की आदत हो ये जरूरी तो नहीं






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